Thursday, 21 May 2026

दर्द भरी शायरी

 "खाईश् नही जीने की, पर जिये जा रहे हैं, 

ज़हर ज़िंदगी का बस, हम पिये जा रहे हैं, 

छोड़ दिया दामन, उम्मीदों का अब हमने, 

ज़ख़्म ज़िंदगी का, बस हम लिए जा रहे हैं"