दिल में गम और आँखे नम है, दूर सबसे आज हम है, है जवां है ये शाम आज भी पर जाने क्यों इस तरह तनहा हम हैं, कभी होती थी रंगीन ये ज़िन्दगी और आज अधूरी सी लगती है हर ख़ुशी, थे कभी अनजान हर दर्द से आज दर्द भरे अफ़साने के साथ जीने पर मज़बूर हम हैं, मुस्कुराते थे हर पल कभी पर आज पल पल रोते हम हैं, सोते थे चेन से रातों में कभी आज पूरी रात जागते हम हैं, अपनी वफ़ा पे गुमान था कभी आज अपनी इस वफ़ा पे अश्क बहाते हम हैं, और क्या बताऊ तुम्हे ऐ मेरे यारों कि इस दिल में कितना गम है और इसलिए ही मेरी ये आँखे नाम है…
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