"तुझे क्या बताऊँ ऐ मेरे हमदम
किया है कितना प्यार तुझसे हरदम
ना ही कदर की मेरी किसी बात की
है तेरी याद मैं आज भी ये अॉखे नम
किया है कितना प्यार तुझसे हरदम
बेवफाई पर तेरी रोते हैं दिन रात हम
क्योंं नसीब ने दिया मुझे बेवफा सनम
पर शिकवा नही किसी से कोई
ना ही कोई मुझे गिला है
वफा के बदले मिली बेवफाई
इन लकीरों मैं ही ये लिखा है
दिल तोड़ने वाले ने ही तोड़ी हर कसम
जान भी उसीने ली जिसे कहा जानम
उसे है पता बिन उसके मुझमैं कहॉ दम
आज वो नही पास मेरे तभी हाथ मैं है रम
काश लौट आ फिर मेरी बाहों मै जिन्दगी
भुला दुँगा तेरी हर एक खता जो तूने की
तेरे बिन हूँ कितना तन्हा सुन मेरी शबनम
तुझे क्या बताऊँ ऐ मेरे हमदम
किया है कितना प्यार तुझसे हरदम
तुझे क्या बताऊँ ऐ मेरे हमदम
किया है कितना प्यार तुझसे हरदम"
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