Wednesday, 25 September 2024

दर्द भरी शायरी

 बहुत  कुछ  कहना  है पर ज़ुबाँ खामोश है

है दिलमे  बहुत  कुछ पर  ज़ुबाँ खामोश है

जी  चाहता  है  बयाँ कर  दू जो है  दिल मे मेरे

कैसे करू बयाँ सुनने वाला ही खुदमें मदमोश है