Friday, 31 October 2014

ईश्वर वाणी-61

ईश्वर कहते हैं: उन्होंने इस धरा पर मनुष्य को केवल यहाँ के एक सेवक के रूप में भेजा है जो इस धरा और  समस्त प्राणियों की प्रकृति की देखभाल कर सके और इसीलिए उन्होंने मनुष्य को अन्य प्राणियों से अधिक मष्तिष्क और शक्ति प्रदान की ताकि वो इन्हे प्रकृति एवं प्राणियों की उचित ढंग से हिफाजत कर सके किन्तु मानव ने समय के साथ इसका दुरूपयोग करना शुरू कर दिया, प्रकृति एवं प्राणियों का शोषण एवं दोहन शुरू कर दिया,



ईश्वर कहते हैं मनुष्य की  इसी प्रवत्ति के कारण आज मनुष्य-मनुष्य का दुश्मन बना हुआ है, मनुष्य- मनुष्य का शोषण और अब दोहन कर रहा है, ईश्वर कहते हैं मनुष्य की यही प्रवत्ति उसे विनास की और ले जा रही है,


ईश्वर कहते हैं यदि मनुष्य अब भी नहीं रुका तो बहुत ही शीघ्र उसका विनास होगा और इसका जिम्मेदार खुद मनुष्य ही होगा … 




ईश्वर वाणी -60

ईश्वर कहते हैं हमें सदा दूसरों के साथ नेकी करनी चाहिए यघपि जिसके साथ हम नेकी कर रहे हैं वो हमारे विषय में कुछ भी सोचे, ईश्वर कहते हैं भले जिसके साथ हम नेकी कर रहे हैं वो इसकी अहमियत न समझता हो, यघपि वो हमारी आवश्यकता के समय हमरे साथ नेकी न करे किन्तु उसकी आवश्यकता के समय हमें उसकी सहायता अवश्य करनी चाहिए और इसके साथ यदि हम नेकी करते हैं तब बदले में उस मनुष्य से हमें इसके बदले नेकी ही मिलेगी ऐसी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए किन्तु इसे ईश्वर का आदेश मान कर करना चाहिए, क्योंकि भले ही किसी के साथ अच्छा और बुरे वक्त में सहायता करने का अहसान एक मनुष्य समय निकलने के बाद अवश्य भूल जाए किन्तु ईश्वर नहीं भूलता, ईश्वर प्रतेक प्राणी को उसके कर्मो अनुसार ही फल देता  है, जिसने किसी के साथ नेकी की है उसके अनुरूप उसे फल मिलेगा और और जो किसी की सहायता को भूल जाए और अपने स्वार्थ में लीन हो उस सहायता देने वाले मनुष्य को भूल जाए उसे उसके अनुरूप ही ईश्वर फल देते हैं,



ईश्वर कहते हैं जब फल देने वाला मैं हूँ तब तुम अपने अच्छे और बुरे कर्मो के फलों की आशा मानव से क्यों करते हो, निरंतर कर्म करते रहो, और जो तुम्हारे कार्मोनुसार सही होगा उसी  अनुसार मैं तुम्हे फल दूंगा।



ईश्वर वाणी -59

"ईश्वर कहते हैं मैं जल से भी अधिक निर्मल हूँ, वायु से भी अधिक पारदर्शी हूँ, पर्वत से भी अधिक कठोर हूँ, कली से भी अधिक कोमल हूँ, बादल से भी अधिक हल्का हूँ, यधपी मैने ही खुदसे समस्त श्रष्टी को ढक रखा है इसलिए मैं कन-कन में हूँ किंतु यदि तुम्हे मुझे प्राप्त करना है मेरी कृपा को पाना है तो मैं तुम्हारी सच्ची उन प्राथनाओं  में हूँ"


आज मिले हों दो अजनबी ऐसी फिर मुलाकात हुई

फिर ऐक वक्त के बाद उनसे मेरी बात हुई, 
थे वो कभी करीब इतना दिलके,
 आज मिले हों दो अजनबी ऐसी फिर मुलाकात हुई

Tuesday, 28 October 2014

होसला मैंने रखा है


"हूँ तन्हा कितनी मैं पर ज़िंदगी जीने का होसला मैने रखा है,
खड़ी हूँ अकेले इन रस्तो पर लेकिन अकेले ही चलने का होसला मैने रखा है,
टूट कर बिखर गये है ख्वाब मेरे पर पॅल्को पर उन्हे आज भी सज़ा रखा है,
मिली है ठोकरे ही मुझे इस ज़हन में फिर भी खड़े होने का होसला मैने रखा है,


दिए है गम और अश्क ही मुझे हर इंसान ने फिर मुस्कुराते रहने का होसला मैने रखा है"


हॅपी दीवाली विथ स्वीट

"जगमग दीपो वाली आई रात निराली, चहक रहा हर नुक्कड़ आज चमक रही हर गली, सज़ा हुआ है हर आँगन आज बनी हुई है रंगोली,
विराजे लक्ष्मी-गणेश आज यहा इसी उम्मीद में साज़í हुई है पूजा की थाली,
गूँज उठा है पटाखो से हर द्वार छाई  हुई फुलझड़ियो की लाली,

देख नज़ारे आज के अर्चू कहे आप सबको हॅपी दीवाली विथ  स्वीट "

Sunday, 19 October 2014

मेरा गीत

ए दिलरुबा तू ये तो बता हो गया क्यों तू मुझसे जुड़ा,
क्यों बन गया तू यू बेअवफा, 
कमी क्या लगी तुझे मेरी आशिकी में,-२ 

 हुई क्या ख़ाता मुझसे मेरी दीवानगी में,
  दे कुछ वज़ह हां दे कुछ वज़ह,
 ए दिलरुबा ए दिलरुबा कुछ तो बता तू कुछ तो बता

, ए मेरी हमनशीं दे कुछ तो वज़ह, 
ए मेरी हमनशीं दे कुछ तो वज़ह,
 ए मेरी ज़िंदगी ना रूठ कर तू यू दूर जा, ना दूर जा,

 टूट कर बिखर रहा हूँ हर रोज़ यहाँ में तेरे बगेर,
 आ थाम कर हाथ मेरा लग जा गले हा लग जा गले
, ना दूर जा, ना दूर जा, ना दूर जा, अब ना और तू मुझे यू सता,-२ 

 ना दूर जा ना दूर जा, आ लौट आ आ लौट आ, 
ना रह सकूँगा तेरे बिन अब तो मैं, ना जी सकूँगा तेरे बिन अब तो मैं, 
ना बन तू यू बेवफा, ना ब आन तू यू बेवफा, ए दिलरुबा ए दिलरुबा , -२ 



ए दिलरुबा तू ये तो बता हो गया क्यों तू मुझसे जुड़ा,
क्यों बन गया तू यू बेअवफा, 
कमी क्या लगी तुझे मेरी आशिकी में,-२ 

एक दफ़ा मूड कर तो देख ए मेरी ज़िंदगी

बदले हो तुम या बदला ये ज़हाँ लगता है,
छिप गया है आसमान में कही ये चाँद लगता है
,रूठ कर तेरे यू जाने से जीवन मेरा वीरान लगता है,
 एक दफ़ा मूड कर तो देख ए मेरी ज़िंदगी
 बिन तेरे घर भी ये मेरा शमशान लगता है 


उसी बेवफा दिलबर की याद आज इस दिल को फिर आई है

आज फिर इस दिल ने ली अंगड़ाई है,
 आज फिर मेरी आँख भर आई है
, भुला देना चाहते जिसे हम, 
 दूर जाना चाहते हैं जिससे हम, 
उसी बेवफा दिलबर की याद 
आज इस दिल को फिर आई है 

है अधूरी मेरी सांसो की डोर बिन दोस्ती के तुम्हारी

है खुदा से ज़्यादा प्यारी दोस्ती तुम्हारी, 
है ज़िंदगी से प्यारी दोस्ती तुम्हारी, 
ना होना कभी खफा  मुझसे  ए मेरे दोस्त,
 है अधूरी मेरी सांसो की डोर बिन दोस्ती के तुम्हारी 

इशवर वाणी -58