Friday, 31 October 2014

ईश्वर वाणी-61

ईश्वर कहते हैं: उन्होंने इस धरा पर मनुष्य को केवल यहाँ के एक सेवक के रूप में भेजा है जो इस धरा और  समस्त प्राणियों की प्रकृति की देखभाल कर सके और इसीलिए उन्होंने मनुष्य को अन्य प्राणियों से अधिक मष्तिष्क और शक्ति प्रदान की ताकि वो इन्हे प्रकृति एवं प्राणियों की उचित ढंग से हिफाजत कर सके किन्तु मानव ने समय के साथ इसका दुरूपयोग करना शुरू कर दिया, प्रकृति एवं प्राणियों का शोषण एवं दोहन शुरू कर दिया,



ईश्वर कहते हैं मनुष्य की  इसी प्रवत्ति के कारण आज मनुष्य-मनुष्य का दुश्मन बना हुआ है, मनुष्य- मनुष्य का शोषण और अब दोहन कर रहा है, ईश्वर कहते हैं मनुष्य की यही प्रवत्ति उसे विनास की और ले जा रही है,


ईश्वर कहते हैं यदि मनुष्य अब भी नहीं रुका तो बहुत ही शीघ्र उसका विनास होगा और इसका जिम्मेदार खुद मनुष्य ही होगा … 




1 comment:

  1. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शनिवार- 01/11/2014 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः 43
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

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