Tuesday, 12 November 2024

ईश्वर वाणी- युग क्या है??

 हमने अक्सर चार युगों के बारे मे सुना है, ये चार युग है क्या? आज इसके बारे में जानते हैं, ये चार युग ब्रह्मांड की वो चार अवस्थाएँ खासकर हमारे सौर मंडल की चार अवस्थाएँ है, प्रथम अवस्था शिशु अवस्था जिसे सतयुग कहा जाता है, शिशु के समान तब वहा लोगों का जीवन और स्वभाव था, तभी आज भी शिशु को भगवान् स्वरूप कहते हैं, दूसरी अवस्था त्रेता युग, जो बालक समान व्यवहार था उस काल के मनुष्यों का, कुछ बालक झूठे मक्कार स्वार्थी चोरी करने वाले क्रोधी और तमाम गलत कृत्यो मे विलीन हो जाते हैं किंतु कुछ अच्छे कर्म और सौम्य रूप से बाल्यावस्था को जीते हैं, द्वापर युग, ek युवा युग, जिसमे एक वयस्क व्यक्ति के समान स्वार्थ, छल कपट, द्वेष, व तमाम बुराइयाँ है, तो वही कुछ लोग अछाइयों के साथ जी तो रहे हैं पर कठिनता से, कलियुग अर्थात वृथावस्था, अर्थात सब कुछ देख लिया जी लिया, अब खत्म होने की कगार पर है पर उतना ही अहंकार, मोह छल कपट व बुराइयाँ है, जो युवा अवस्था मे नही हासिल कर सके वो वृधावस्था मे हासिल करने की अंधी दौड़। 


सत्य तो ये है, हर व्यक्ति आज भी इन चार युगो को जी रहा है, जब उसका जन्म होता है तब वो शिशु अवस्था मे सतयुग मे जीता है, उसके अंदर कोई छल कपट बुराई नही होती, वही बाल्यावस्था मे वो त्रेता युग मे जीता है जहाँ वो झूठ बोलना चोरी करना पाप करना और तमाम काम सीखता है, कुछ अच्छे कर्म भी सीखता है वही गलत भी और जो सीखता है उसका अनुसरण करता है, वही द्वापर युग मे आकर यानी युवा अवस्था मे आकर जो अब तक सीखा उसमें पूरी तरह perfect हो जाता है और वैसा व्यवहार करता है, अच्छे व्यक्ति अच्छा करते हैं पर कितना भी अच्छा कर ले कही न कही मलिनता उनके व्यवहार मे रहती ही है और जिन्होंने गलत सीखा है वो पूर्ण रूप से उसका पालन करते हैं और कभी सुधारते नही और न अपने गलत कर्म पे कोई पछतावा करते हैं, वही कलियुग यानी वृधावस्था इस अवस्था मे मे भी इनका व्यवहार वैसा ही होता है जैसे युवा अवस्था मे था, अच्छे कर्म के व्यक्ति गरीब दुःखी अकेले और जीवन को ढोते है वही धूर्त व्यभिचारी तुच्छ सोच के व्यक्ति जो पहले कर रहे थे वही करते हैं और जो युवा अवस्था मे न कर सके वो करने मे लगे रहते हैं। 


इसलिए आज भी हर व्यक्ति ये चार युग जीता है

Sunday, 27 October 2024

दर्द भरी शायरी

 तेरे बिन जीना सीख लिया

तेरे बिन रहना सीख लिया

तू रहे खुश जहाँ मे सदा

बिन तेरे खुश होना सीख लिया

Wednesday, 23 October 2024

Romantic shayri



"जाने कब कोई दिल को भाने लगा

एक अजनबी दिलमें आने लगा

न देखा न जाना जिसे कभी हमने

पर ये दिल उसे अपना बनाने लगा"


"मोहब्बत उनसे ही क्यों होती है, जिन्हे पा नही सकते, 

दूर उनसे हुआ नही जाता, किसी और के हो नही सकते

रूह में बस जाते हैं जो अक्सर, हर साँस के साथ उन्हें

दिल से मिटा नही सकते , किसी और को समा नही सकते"

Wednesday, 16 October 2024

रोमांटिक शायरी

 तेरे जैसा कोई न होगा

दिल तेरे सिवा किसीका न होगा

मोहब्बत हुई है रूह से तेरी

ये ईश्क अब किसी और से न होगा

Tuesday, 15 October 2024

Romanctic shayri

 "तेरे लिए हद से गुज़र जायेंगे

तेरे लिए क्या कुछ कर जायेंगे

न छोड़ना साथ तुम मेरा कभी

बिन तेरे जीते जी मर जायेंगे"



"कोई शिकवा गिला करते हैं

दिन रात तेरे लिए दुआ करते हैं

रहे सलामत सदा चाहें जहाँ रहे

रब से बस यही फरियाद करते हैं"

Wednesday, 25 September 2024

दर्द भरी शायरी

 बहुत  कुछ  कहना  है पर ज़ुबाँ खामोश है

है दिलमे  बहुत  कुछ पर  ज़ुबाँ खामोश है

जी  चाहता  है  बयाँ कर  दू जो है  दिल मे मेरे

कैसे करू बयाँ सुनने वाला ही खुदमें मदमोश है

Friday, 16 August 2024

दर्द भरी शायरी

 अब  हकीकत  से, हसीं  ये ख्वाब लगने लगे हैं

भूले  बिसरे  अपने, वहा हर दिन मिलने लगे हैं

जी चाहता है, एक गहरी नींद मे अब सो जाऊ

ख्वाबो मे सही,मोहब्बत के फूल वहा खिलने लगे हैं

Wednesday, 14 August 2024

Shayri

 जी चाहता है ,एक गहरी नींद मे ऐसे सो जाऊ

न जागू फिर कभी, बस इन ख्वाबो की हो जाऊ

मिलते है हर दिन, पीछे छूट चुके अपने वहाँ मुझे

काश फ़िर उनकी हो जाऊँ, न कभी लौट के आऊँ

दर्द भरी कविता

 मोहब्बत मे हमें,जिस्म के सौदागर बहुत मिले

पग-पग हुस्न के ये, अजीब ठेकेदार बहुत मिले

पर न मिल सका, एक सच्चा हमराही यहाँ हमें
इंसानियत कुचलने वाले, ये दावेदार बहुत मिले

बस इक हसरत थी, कोई हमें भी अपना बना ले
मोहब्बत मे रुस्वा करने वाले, हरबार बहुत मिले

लेकर खुशबू हुस्न की, कुचलना फ़िर सबने चाहा 
ज़िंदा लाश बनाने वाले, बार- बार बहुत मिले

थक चुकी 'मीठी' बातों से, दुनिया की अब यहाँ
'ख़ुशी' दिखा ज़ख़्म देने वाले, सरेबाजार बहुत मिले

मोहब्बत तो नाम अब बन चुका, यहाँ हवस का 
भूख जिस्म की मिटाने वाले, भरे दरबार बहुत मिले

Sunday, 11 August 2024

Pyari shayri

 जी चाहता है ,एक गहरी नींद मे ऐसे सो जाऊ

न जागू फिर कभी, बस इन ख्वाबो की हो जाऊ

मिलते है हर दिन, पीछे छूट चुके अपने वहाँ मुझे

काश फ़िर उनकी हो जाऊँ, न कभी लौट के आऊँ

Tuesday, 30 July 2024

प्यार एक ज़िम्मेदारी है- हिंदी लेख

 मैंने ये अक्सर देखा है लोग आजकल जितनी जल्दी प्यार मे पड़ जाते हैं उतनी ही जल्दी इससे बोर भी होने लगते हैं, रिश्तें से दूर भागने लगते हैं, एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने लगते हैं, आखिर ऐसा क्यों?? जबकि पहले सबकुछ अच्छा था फिर अचानक क्या हो जाता है की रिश्ता बोझ लगने लगता है, प्यार धीरे धीरे कम होने लगता है, रिश्तों मे अलगाव और टकराव होने लगता है! 

इसका कारण है शुरुआत मे एक दूसरे के साथ वक़्त बिताना, करीब आना इसलिए अच्छा लगता क्योंकि कुछ भी नया हमारे जीवन मे आता है तो अच्छा ही लगता है चाहे नया घर हो गाड़ी हो नई नौकरी हो अथवा नया रिश्ता, 

पर वक़्त के साथ जैसे घर, गाड़ी अथवा नौकरी को ठीक रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, वैसे ही जिस जोश और जुनून के साथ अपना रिश्ता शुरू किया था उसके लिए भी कड़ी महनत करनी पड़ती है, 

वक़्त के साथ साथ रिश्तें मे ज़िम्मेदारी भी बड़ जाती है, आप इन जिम्मेदारियों से भाग नही सकते, चाहे आप विवाहित है अथवा अविवाहित, मर्द है या औरत, ये आप दोनो की ज़िम्मेदारी है रिश्ता संभालने की, एक दूसरे के प्रति कोई कर्तव्य और ज़िम्मेदारी भाव रखना और पूरा करना, एक दूसरे की जरूरत का ध्यान रखना और पूरा करने का प्रयतन करना ये आप दोनो की ज़िम्मेदारी है जिसको निभाना आवश्यक है अगर आप किसी के साथ वास्तव मे रिश्तें मे है और इस रिश्तें के प्रति गभीर है, ये आप दोनो की ज़िम्मेदारी है एक दूसरे का साथ दे और वक़्त वक़्त पर स्पेशल फील करवाते रहे! 

पर आज रिश्तें इसलिए कमजोर हो रहे हैं, टूट रहे है क्योंकि या तो कोई एक पक्ष या फिर दोनो पक्ष जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं, यदि दोनो भाग रहे हैं फिर भी ठीक है क्योंकि वो कह सकते हैं न तुम मुझे अपने ज़िम्मेदारी समझो और न मैं, पर अगर कोई एक पक्ष रिश्तें को संभलता है, रिश्तें मे अपनी ज़िम्मेदारी निभाता है लेकिन दूसरा पक्ष कोई न कोई बहाना बना इससे दूर भागने लगता है तब रिश्तें कमजोर होने लगते हैं, भले आपके जीवन में और रिश्तें है काम है जिनके प्रति आप अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं किंतु जिसके साथ आप रिश्तें मे है उसके प्रति कोई क्या ज़िम्मेदारी नही बनती आपकी?? 

इस गेरज़िम्मेदरना व्यवहार से रिश्तों मे टकराव होने लगते हैं, प्यार जैसे खूबसूरत रिश्तें से मन विचलित होने लगता है, लोग बोलने लगते हैं शायद मोहब्बत मेरे लिए नही है, पर मोहब्बत तो सबके लिए है, लेकिन ये देखना है आप इस रिश्तें की कद्र कितनी करते हैं, इस रिश्तें को अपनी ज़िम्मेदारी मान सभाल के रखते हैं या गेरज़िम्मेदरना व्यवहार दिखा इस खूबसूरत रिश्तें को दूसरे के दोष बता खत्म कर देना चाहते हैं! 

जैसे जैसे वक़्त बीतता है जीवन मे कई उतार चढ़ाव आते ही है, ये परीक्षा होती है आप अपने साथी का साथ उस वक़्त देते हैं की नही जब उसको आपकी सबसे अधिक आवश्यता होती है, अगर उस वक़्त आप उसके साथ है, उसके आँसु पौछ रहे हैं तो निःसंदेह आप अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं, सामने वाले की आवश्यता को ध्यान मे रख कर इसको सही तरीके से पूरा करने की कोशिश भी कर रहे हैं तो ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं, पर यदि आप अपने साथी के दुख मे साथ नही, उसके प्रति जागरूक नही की उसकी आवश्यता क्या है कैसे पूरा करे, निःसंदेह आप प्यार के काबिल नही, इस खूबसूरत रिश्तें के काबिल नहीं क्योंकि प्यार एक साझेदारी है एक ज़िम्मेदारी है और यो किसी गेरज़िम्मेदार मर्द या औरत के लिए नही है! 

इसलिए प्यार मे तभी पड़े जब इस ज़िम्मेदारी को सही ढंग से उठाने के काबिल आप हो, कोई फर्क नही पड़ता आपकी उमर क्या है, कभी 18 साल का बच्चा ये ज़िम्मेदारी अच्छे से निभा लेता है तो कोई 70 की उमर मे ज़िम्मेदारी के नाम पर रिश्तों मे कमी निकाल के दूर भागता है, यहाँ बात परिपक्वता के साथ रिश्तों के प्रति संवेदनशील होने की भी है, यदि आप अपने रिश्तों के प्रति संवेदनशील है तो ज़िम्मेदारी निभायेंगे अगर संवेदनहीं है तो रिश्तें मे साथी मे कमी निकाल कर उससे दूर भागेंगे और कहेंगे आप मोहब्बत के काबिल नही या नसीब मे मोहब्बत नही आपके क्योंकि आप सही मायने मे ज़िम्मेर व्यक्ति नही इसलिए इस खूबसूरत रिश्तें के काबिल भी नही, क्योंकि प्यार सिर्फ सेक्स नही एक ज़िम्मेदारी है!! 

Love shayri

 मजबूरी नही , ज़िम्मेदारी हूँ तुम्हारी

मोहब्बत हूँ,  न कोई लाचारी हूँ तुम्हारी

काश तुम समझ, सकते ईश्क की गहराई

साथी हूँ इसलिए साझेदारी हूँ तुम्हारी

Meri shayri

 न कोई गिला न , शिकवा है अब किसी से

अपना लिया जो, तकदीर ने दिया खुशी से

मोहब्बत मे मिली , मुझे हर पल ये रुस्वाई 

सूख चुके अश्क, न शिकायत है हमनशि से

Tuesday, 16 July 2024

ईश्वर वाणी- परमात्मा

 ईश्वर कहते है आज तुम्हें बताता हूँ, " 

शब्दिक अर्थ परमात्मा का

 प-प्रथम र-रहस्य/रस/रास्ता म-मुख्य, अ-आदि, त-तत्व, म- मैं अ-अनन्त = परमात्मा भाव- संसार  का प्रथम रस्ता रहस्य और रस मैं ही हूं, मैं ही मुख्य और अनादि  हूँ, और मैं हीअनंत हूं क्योंकि मैं परमात्मा हूं..

ईश्वर वाणी- ईश्वर वाणी

 ईश्वर कहते हैं, " शाब्दिक अर्थ ईश्वर


I- ईष्ट/एक, श -शक्ति, व -विदित/विराजित, र - रहेगी =  ईश्वर भाव एक ऐसी ईष्ट की शक्ति वो ईष्ट जो सबका है जो सिर्फ एक है, उसकी शक्ति/ऊर्जा सदा विराजित रहेगी चाहे संसार मे कुछ भी हो .. उस ऊर्जा को कोई कब नुक्सान या नष्ट नही पहुँचा सकता ..

ईश्वर वाणी- भगवान् कौन है

 ईश्वर कहते हैं

शब्दिक अर्थ भगवान् का है ये.. 

भगवान भ-भलाई/भावना, ग-ज्ञान/ज्ञात, वि-विषय, न-नश्वान= भगवान भाव- भलाई की भावना, और जीवन के रहस्य और विषय का ज्ञान जो नश्वर है और जिनके हृदय में सदा बिना किसी रुकावत के  बीना रहता है वो भगवान है... जरूरत का वक्त जब जीव की सहायता हेतु जो हाथ बड़े वो भगवान है अर्थ उसको ज्ञात हुआ ज्ञान हुआ उसका कार्य, विषय का बोध हुआ, जो सहायता की भावना थी मिटी नहि इस्लिये नश्वन नहि हुई इस्लिये वो  भगवान हुआ


कल्याण हो

ईश्वर वाणी- पर्मेश्वर्/ शृष्टि और ब्रह्मांड

ईश्वर कहते हैं, " अक्सर लोग पर्मेश्वर् और ईश्वर को या तो एक समझ लेते हैं या कहते हैं पर्मेश्वर् ईश्वर से भी ऊपर है ,वो समझते है जो प्रथम पूज्य है वो पर्मेश्वर् है, पर उन्हे ये ज्ञान नही पर्मेश्वर् दो शब्दों से मिल कर बना है परम-ईश्वर= पर्मेश्वर्, यंही परमात्मा जो शृष्टि का प्रथम तत्व है उसके और ईश्वर के समागम को पर्मेश्वर् कहते हैं, ईश्वर ने शृष्टि निर्माण के लिए परमात्मा भेजा.. जानने योग्य ये है ईश्वर ने भेजा न की बनाया अर्थात वो तत्व पहले से मौज़ूद था, इसको शिव- शक्ति के रूप मे कहा जा सकता है किंतु वो शिव जो निराकार है और शक्ति उसकी ऊर्जा, उस ने शृष्टि निर्माण किया.. किंतु उससे पहले ब्रह्मांड का निर्माण किया, ब्रह्मांड अलग है शृष्टि अलग, ब्रह्मांड वो ऊर्जा है जिसने सभी ग्रह नक्षत्र और देव लोक विराजित है ठीक वैसे जैसे तुम्हारी देह मे तुम्हारे अंग और तुम्हारी आत्मा विराजित है, तुम्हारी आत्मा और तुम्हारे शरीरिक अंगो के बिना देह नही वैसे ही बिना ग्रह नक्षत्र और लोगों के ब्रह्मांड नही, जैसे तुम्हारी आत्मा तुम्हारी सभी अंगो को ऊर्जा देती है वैसे ही ब्रह्मांड इन्हे ऊर्जा देता है और उसको परमात्मा.. "

यही है शाब्दिक अर्थ परमात्मा का


कल्याण हो

🙏🙏

Friday, 12 July 2024

Sad shayri

 ए ज़िंदगी आखिर क्यों हो ख़फ़ा मुझसे

आखिर दूर जाने की है क्या वज़ह मुझसे

तू रूठ गयी तो जी कैसे पाएंगे हम भला

आखिर हो रही क्यों है तू अब जुदा मुझसे

दर्द वाली शायरी

 खुद को गिरा तुझको उठाते रहे

ज़ख़्म मोहब्बत मे हम खाते रहे

भूल गए वज़ूद खुदका भी है कोई

खुदको मिटा तुझको बनाते रहे

Tuesday, 9 July 2024

दर्द वाली शायरी

 किसी ने मेरे मुस्कुराने की वज़ह पूछी तो आँखे हो गयी नम

मेहफिल मे पूछा गया दिल तोड़के आखिर है तुम्हें क्या गम

रोते-रोते भी अश्क सूख चुके है इन आँखों से अब मेरी दोस्तों

साँसें ज़िंदगी की हर पल घोटती है क्यूँ अब मेरा ये दम





Datd bhari shayri

 ख़ुद  को  गिरा  कर तुझको उठाते  रहे

मोहब्बत मे  हरपल अश्क बहाते रहे

भूल  गयी 'मीठी' वज़ूद  खुदका भी

'खुशी' की चाहत मे ख़ुद को मिटाते रहे

Monday, 8 July 2024

Love shayri

 आ बैठ मेरे पास तुझे कुछ कहना है

दिल कहता है बिन तेरे नही  रहना है

अधूरे है तेरी मोहब्बत के बिना हम

दर्द जुदाई का अब मुझे नही सहना है

Sad shayri

 दर्द  सहकर भी अब रोना नही आता

ख़ता उसकी है ये कहना नही आता

ज़ख़्म दे कर कहते है वो अक्सर मुझे

मोहब्बत मे तुम्हें रहना नही आता


Saturday, 6 July 2024

छिपा है कहीं पर इस भीड़ मे से कोई है- shayri


छिपा है कहीं पर इस भीड़, मे से कोई है

लाखों है लोग, पर वो इनमें से, ही कोई है, 


बस मेरा हमनशीं मेरा ,शहज़ादा है जो
दुनिया की इस मेहफिल मे से, ही कोई है

है हमराज़ मेरे दिलका, मोहब्बत है जो मेरी
चमकते टिमतिमाते सितारों मे से, ही कोई है

ढूंढती है आँखें जिसे हरकहीं ,मेरी सुबह-शाम
बादलों मे छिपा मेरा राजकुमार, ही कोई है

मिले कहीं तो कह दू, तू है बस आशिकी मेरी
तन्हा ज़िंदगी मे कहीं छिपा मेरा प्यार,ही कोई है

खोजती "मीठी" उसको, आज भी हर कहीं
"खुशी" का करे इज़हार मुझे , दिलदार कोई है

ज़ख़्म बहुत मिले इश्क मे मुझे, ज़माने से ऐसे
साथ उम्र भर देने को हो त्यार जहाँ, मे से कोई है

रुलाया सताया तड़पाया, वफा के बदले मुझे
भर बाँहों मे मुझे वफ़ा करे, सच्चा यार वोही है

छिपा है कहीं पर इस भीड़, मे से कोई है

लाखों है लोग, पर वो इनमें से, ही कोई है, 

Sunday, 30 June 2024

Love shayri

 है इंतज़ार फ़िर किसी का 

है ऐतबार फ़िर किसी का

 छिपा है कोई बादलों मे कहीं

है इंतज़ार बस उसी का

दर्द भरी शायरी

 काश कभी किसी रोज़ ऐसे सो जायें, 

कितना भी कोई चाहे फ़िर न जाग पाएँ, 

जी ले ख्वाबो की दुनिया को जी भरकर यु कि

फ़िर कितना भी कोई पुकारे हम न लौट के आयें

Saturday, 29 June 2024

Love shayri

 Archana Mishra:

"काश कोई खूबसूरत ,वो शाम हो,
सामने हो तू मेरे,हाथ मे जाम हो
देख तेरे हुश्न को ,पी ले निगाहों से
पर न तू और न , हम  बदनाम हो"

"क्यूँ हो खफ़ा  बता दो
है जो वज़ह  बता दो
हुई गर खता माफ़ करना
इश्क की न यु सज़ा दो"

Thursday, 27 June 2024

Love shayri

" रब से माँगी कोई ,इक दुआ हो तुम

या मोहब्बत मे मिली, कोई सज़ा हो तुम

सोचा नही था इश्क मे ,ऐसा मुकाम आयेगा

मुझे छोड़ के किसी और पे, मेहरबाँ हो तुम"



"तेरे लिए, हद से गुज़र जायेंगे,
तेरे लिए ,क्या कुछ कर जायेंगे
तू न लेना ,इम्तिहा मोहब्बत का
बिन तेरे, जीते जी मर जायेंगे"


हँसी वाली शायरी

"दिल तोड़ने वाले काश तेरे दिल को भी कोई तोड़े
टूटे हुए इन टुकड़े को फेविकोल से भी न कोई जोड़े"





Romantic love shayri

 बहुत कुछ है कहने को ,पर जुबाँ खामोश है

दूर है तुझ से पर इसमें ,न तेरा न मेरा दोष है
जी चाहता है समेट लू, खुद को तेरी बाहों मे
मोहब्बत तेरी आजभी, करती मुझे मदहोश है

Tuesday, 25 June 2024

Dard wali shayri

 टूटे हुए दिलके साथ, जीना सीख लिया

गमो में डूब कर, मुस्कुराना सीख लिया

शायद ज़िंदगी की कला ,अब समझ आई

ज़ख़्म छिपाने के लिए, पीना सीख लिया

Dard wali shayri

 अपने हो कर भी गेर लगने लगे हो,

पास रह कर भी दूर होने लगे हो,
क्या मोहब्बत का यही अंजाम होता है,
खामोसी से क्या कुछ कहने लगे हो

Romantic shayri

 तेरे इश्क मे आज एक कहानी लिख दूँ

मोहब्बत की दास्ताँ जुबानी लिख दूँ

तू हो राजा मेरा और बनू मे तेरी रानी उसमे

नाम तेरे अपनी ये ज़िंदगानी लिख दूँ



एक सदी से... कविता

 


एक सदी से इंतज़ार था ,किसी का 

जिससे कुछ दिल की बात, कह तो ले


इंतजार था बस उस एक ,हमनशीं का 

जिसके कंधे पे सर रख कर, रो तो ले


है आज भी तन्हा ,बीते कल की तरह

न मिला जिससे हाल ए दिल, कह तो ले


जिसको बनाना चाहा, राजगार दिलका

चला गया कहकर, तेरा दर्द हम ले क्यों ले


है अल्फाज़ बहुत सारे, बयां करने को 

कोई नही ऐसा जो, इन्हे कभी सुन तो ले


खुद रोते हैं खुद ही ,अश्क पोछ लेते है 

मेरे रोने की वज़ह, काश कोई पूछ तो ले


रोज़ टूटते है रोज़ बिखरते है ,जिनके लिए

काश कभी यु बिखरा हुआ, मुझे देख तो ले

Meri shayri

 "काश इक झलक हम तुझे देख तो लेते, 

कुछ पल इस ज़िंदगी के जी तो लेते, 

रुलाया बहुत है अपनो ने गेर बना कर

काश साथ किसी गेर के हम मुस्कुरा तो लेते"

Romantic shayri

 वक़्त मिले तो मुलाकात कर लेना, 

बस कुछ थोड़ी सी बात कर लेना, 

 तेरे सीने से लगने की हसरत है मुझे, 

बाहों मे भर कर ये खुराफात कर लेना"

Romantic kavita- ek tara hoon mein

 आसमां से टूटा बस,  वो एक  तारा हूँ मैं

कहते  है  ये लोग की, बड़ा बेचारा  हूँ  मैं

जिंदगी  गमो के, तोहफे  दे ती रही मुझे
फ़िर  भी  ज़िंदगी से, न कभी हारा  हूँ मैं

बिखरा  हूँ जमीं  पे, इस कदर फिर भी
जाने कितनों का ,आज भी सहारा हूँ मैं

छिपाके अश्क,हस लेता हूँ मेहफिल में
तभी लोग कहते हैं ,बड़ा आवारा  हूँ  मैं,

कभी दुनिया चूमती थी, कदम मेरे  ऐसे
कहते थे ये लोग, की बड़ा ही प्यारा हूँ मैं,

आज तोड़के दिल, ठुकरा मेरी मोहब्बत
वोही कहते हैं अब, बड़ा ही नकारा हूँ मैं,

सज़ा मिली मुझे ,सच कहने की कुछ ऐसे
इश्क के आँसुओ की ,अब जलधारा हूँ मैं,

हर बार गिराया तोड़ा मिटाया गया मुझे
फ़िरभी वज़ूद है मेरा, एक विचारधारा हूँ मैं

झुका ले जितना झुकाना है ,तुझे इश्क मे
फ़िर भी चमकूंगा आखिर, इकतारा हूँ मैं

ज़िंदगी ने ज़ख़्म बहुत दिये ,मुझे इश्क मे
फिरभी गले तुझे लगाया,इश्ककी धारा हूँ मैं

आसमां से टूटा बस,  वो एक  तारा हूँ मैं
कहते  है  ये लोग की, बड़ा बेचारा  हूँ  मैं


Friday, 21 June 2024

Wah ri Sabita wah 😂🤣 (kavita)

 2014 me kisi k liye likhi mere dwara likhi kuchh lines... 


"mujhe kal mili meri saheli sabita(changed name),
uski khidmat mein likhi ek kavita,

par jane kyon badla-2 uska mizaz tha
shayad isliye ki uske pati ka naam bajaj tha,
saath jahan wo unke nikli akeli thi,
raah mein barso baad mili uski ye saheli thi,
dekh usse jahan pukara maine 'Sabita',
ud gaye uske hosh kyonki saath uska pati tha,
karte nahi thkti thi jahan tarif apne pati ki wo,
aaj saamne khada shakhs wo hi tha,
footi thi ek aankh uski aur har ek daant bhi nakali tha,
dekh uss hasin shakhs ko dil se bas ye hi nikla
'arre wah ri sabita,
kya issi ka intezaar tune barso kiya tha',
yaad kar un dono ke ishk ki daastan hamne likh daali khidmat mein unki bas ek kavita,
wah ri sabita wah

Thursday, 20 June 2024

ईश्वर वाणी- ग्रह और चकरास् का रिश्ता

 ग्रह जो जीवन जाती के चक्रो से संभंधित है


1- मूलाधार चक्र

ग्रह- गुरु,मंगल और प्रथ्वी

कारण- पृथ्वी को मंगल ग्रह की माता कहा गया है, साथ ही यही पृथ्वी हर जीव की बुनियादी आवश्यकता पूर्ण करती है, मंगल के साथ इसका रिश्ता हमारे भौतिक रिश्तों के साथ संबंधों को दिखता है, हमारे रिश्ते माता पिता भाई बहन रिश्तेदारों पड़ोसियों दोस्त पति पत्नी प्रेमी प्रेमिका सहपाठियों इत्यादि से कैसे है दिखाता है, अगर रिश्ते खराब है या भौतिक बुनियादी आवश्यकता को पूरा करने मे समस्या आ रही है तो इनका उपचार आवश्यक है, वही गुरु व्यक्ति की की बुनियादी शिक्षा और उच्च शिक्षा और उस से उसको इस भौतिक जीवन मे कितना लाभ होगा ये बताता है, मूलाधार चक्र के संतुलित होने पर ये तीन ग्रह मजबूत स्थिति मे आते हैं जिससे व्यक्ति को लाभ होता है,

2- स्वादिष्ठन चक्र
ग्रह- शुक्र

यधपि शुक्र धन की प्रचुरता को दर्शता है, पर स्वादिष्ठान चक्र का स्वामी होने के कारण व्यक्ति की कामुकता और सेक्स लाइफ को दिखाता है, अगर ये बहुत ज्यादा एक्टिव है तो व्यक्ति sexualy active होगा हद से ज्यादा, अगर ये खराब है तो सेक्स मे दिलचस्पी नही होगी जिससे उसकी शादीशुदा ज़िंदगी पर असर होगा, sexual emotions हद से ज्यादा होंगे या बिल्कुल नही होंगे अगर इसमें संतुलन नही है तो, इसलिए इस चक्र को संतुलित रखने को कहा जाता है,

3-मणिपुर चक्र
ग्रह- सूर्य

सूर्य सभी ग्रहो का स्वामी है, इसलिए इस का असर इस चक्र पर भी पड़ता है, ये चक्र पारिवारिक करीबी रिश्ते जैसे पति पत्नी माता पिता संतान और सगे भाई बहनो से संबंध और धन, नाम और शोहरत को दिखाता है, अगर ये संतुलित है तो व्यक्ति के रिश्ते परिवार से अच्छे बने रहेंगे, नाम और शोहरत मिलेगी, सूर्य देव का आशीर्वाद मिलेगा,
लेकिन ये चक्र खराब है तो रिश्ते खराब होंगे, पैसों की कमी होगी, बदनामी होगी, पेट मे गड़बड़ रहेगी, शरीर मे ताप अधिक रहेगा, इसलिए इस चक्र को संतुलित रखे, ठंडी और पेय चीजों का सेवन करे,

4- अनाहत चक्र
ग्रह- बुध

आमतोर पर बुद्ध को बुद्धि से संबंधित ग्रह मानते हैं, पर इसका संबंधित जीव जाती के अनाहत चक्र (हार्ट chakra) से है, बुध ग्रह हमारी भावनाओ को
दिखाता है, हमारे दुख सुख हसना रोना सब इसकी देन है, इसलिए ये जीव जाती के अनाहत चक्र को संचालित करता है अतः अनाहत चक्र का स्वामी है,

5- विशुद्ध चक्र
ग्रह- शनि, राहु- केतु

वाणी कैसी होगी, किसको क्या कहना है, क्या उत्तर देना है ये सब इन ग्रहो के कारण है, अगर विशुद्ध चक्र जागृत और संतुलित है, तो व्यक्ति कभी किसी के लिए गलत वाणी नही निकलता, जो भी वो कहता है लोग सुनते और भरोसा करते हैं, ऐसा व्यक्ति न झूठ बोलता है न ही झूठ बर्दास्त करता है, किंतु अगर ये चक्र असंतुलित है तो व्यक्ति झूठा, अपशब्द बोलने वाला, गलत बोल बोलता वाला होगा, लोग उसकी तरफ आकर्षित नही होंगे, हुए भी तो उसके साथ रुकेंगे नही, मित्र से अधिक शत्रु बनायेगा, इसलिए इस चक्र को संतुलित रखना चाहिए, आध्यात्मिक दृष्टि से भी आध्यात्मिक जगत मे इसका बड़ा योगदान है, समस्त सिद्धियाँ यही रहती है,

6- आज्ञा चक्र
ग्रह- चंद्रमा

व्यक्ति का पूर्वानुमान या पूर्वभास् छमता कैसी है ये इस ग्रह और चक्र से पता चलता है, अगर कुंडली मे चंद्रमा अच्छी हालत मे है और आज्ञा चक्र थोड़ा सा भी एक्टिव और संतुलित है तो व्यक्ति अपने intution का उपयोग सही दिशा मे कर के बहुत कुछ प्राप्त कर सकता है किंतु अगर ये blocked है या असंतुलित है तो आपको जीवन मे नुकसान उठाना पड़ सकता है,

7-  सहस्त्रार् चक्र
ग्रह- गुरु,समूचा ब्रमांड

ये चक्र व्यक्ति की सोच, बाल, चेतन, अवचेतन unconcious mind और जन्म जन्मो की यादों को खुद मे साजोय हुए हैं, व्यक्ति क्या और कब फेसले लेगा, कितने सही और कितने गलत फेसले लेगा, उसकी सोच अच्छी और समाज कल्याण के लिए है या आपराधिक सोच है, ये सब इस चक्र के संतुलित और असंतुलित होने पर निर्भर करता है साथ ही ये कितना एक्टिव और blocked है ये जीव की सोच से पता लगता है! साथ ही गुरु व्यक्ति के गुन और दोषों को बताता है, अगर सहष्ट्रार् संतुलित है तो व्यक्ति गुनी होगा अगर असंतुलित है तो आपराधिक सोच का मालिक स्वार्थी होगा

Written by so called anti hindu

Batya gya swam pita parmeshwar

ईश्वर वाणी

 ईश्वर कहते है, "हे मनुष्यों आज तुम्हें मेरे स्वरूप जो ब्रह्मा विष्णु और शिव के रूप मे जाने जाते हैं उनके विषय मे बताता हूँ!! 


ब्रह्मा- जो समूचे ब्रमांड के रचनाकार है, अर्थात जिनके एक अंश अर्थात अंड से पूरे ब्रमांड की रचना हुई, ऐसी विशाल रचना के रचियता ही ब्रह्मा है, समूचे भौतिक जगत, देह, वनस्पति जो कुछ भी भौतिकता के लिए आवश्यक है, उनकी रचना करने वाला भौतिकता को रचने वाला ही ब्रह्म है!! 

विष्णु- नाम के अनुसार विष- नु= विष्णु, विष अर्थात ज़हर, नु अर्थात बहना साथ ही नु मतलब माया,निरंतर विष बहना विष्णु और संसारिक माया मे जो विष समान है उसके लिए कार्य करना ही विष्णु का एक अर्थ है, 

किंतु दूसरा शाब्दिक अर्थ है परिवर्तन, चाहे ये अच्छा हो या बुरा, पसंद हो या नही, पर हर पल परिवर्तन होता है होता रहेगा, यही कार्य है विष्णु का, तमाम परिवर्तन के बाद भी जो सहिष्णु रहे वही है विष्णु! 


शिव- जो भौतिक जगत के नियमो को सही मानता है वो हर बार मरता है जन्म लेता है, किंतु जो देह को शव और आत्मा को जीवन मानता है वो है शिव, अर्थात भौतिकता नाशवान है पर आत्मा नही, इसलिए जो अमर है उससे प्यार करो, जो मिट्टी का बर्तन बार बार टूट जाए उससे अधिक मोह न रखो, मोह उससे रखो जो इन बर्तनो मे भरा गया, शिव यही बताते हैं, उनके तांड्वा का यही मतलब है, जो भौतिक है नष्ट होगा और यही बात माता सती ने खुद को सती कर के भी बताई जो भौतिक है नष्ट होगा पर जो अभोतिक है युगो तक रहेगा, यही शिव का वास्तविक नाम और कार्य है!! "


🙏🙏🙏🙏

Wednesday, 19 June 2024

ईश्वर वाणी

 ईश्वर बताते हैं, "हे मनुष्यों आज तुम्हें मैं त्रिदेवो शाब्दिक अर्थ और उनका तुम्हारे जीवन पर क्या असर पड़ता है वो बताता हूँ, त्रिदेव जिन्हे हिंदू धर्म मे ब्रह्म विष्णु और महेश कहा जाता है, वास्तव मे ये तीन आध्यात्मिक ऊर्जाये है जिनसे आध्यात्मिक और ब्राह्मंदिये कार्य होते हैं, इसी प्रकार तृदेवीयो के विषय मे यही बात है, किंतु tridevi को परमात्मा अर्थात संसार का प्रथम तत्व 'मैं', मैं ही आदि और अनंत, इस ऊर्जा की शक्ति से ही त्रिदेवो का आगमन हुआ, उसी ऊर्जा से आध्यात्मिक और ब्रमांडिये कार्य त्रिदेव संभालते है! 

अगर बात की जाए जीव जाती पर त्रिदेवो का असर है तो तुम्हारे विशुद्ध चक्र जो वाणी और सिद्धि का चक्र है, यहाँ वाणी की ऊर्जा और माँ सरस्वती का भी वास है, तुम्हारी वाणी भौतिक और अभोतिक जीवन से तुम्हें जोड़ती है, 

आज्ञा चक्र- माथे के ठीक बीच तिलक वाले स्थान को आज्ञा चक्र कहते हैं, ये तुम्हें अभोतिकी जगत से जोड़ता है, किंतु इसमें ही तुम्हारी ये भौतिक आँखे भी आती है जो तुम्हें भौतिक दुनिया  और भौतिक सुख की कामना हेतु खीचती है, किंतु तुमने आज्ञा चक्र को ठीक से जागृत कर लिया तो यो भौतिक जगत मिथ्या लगने लगता है, हलकी इसी आज्ञा चक्र से किसी का जन्मो पुराना अतीत, वर्तमान और आने वाले जन्म भी देखे जा सकते हैं, पूर्वनुमं भी इसी चक्र से लगाया जाता है! 

सहस्त्रार् चक्र- मस्तिष्क और सर के बालों के उपर के हिस्से को सहस्त्रार् चक्र कहते हैं जो जीवन जाती की जन्म जन्मो यादों के साथ अतीत वर्तमान और भविष्य से जुड़े सही गलत निर्णयो के बारे में बताता है, किंतु ये व्यक्ति को अनंत ब्रमांड से जोड़ कर अनन्त आध्यात्मिक ज्ञान भी प्रदान करता है किंतु इसके लिए इस चक्र का जागृत होना आवश्यक है, और त्रिदेव इन चक्रो को देखते हैं, साधना और सिद्धि और आध्यात्मिक जगत मे जब व्यक्ति प्रवेश करता है तब त्रिदेव इन चक्रो को जागृत संतुलित कर आध्यात्मिक जगत मे आगे बढ़ाते हैं! 

विष्णु- विशुद्ध चक्र को जागृत करते हैं, कब किस्से क्या कहना है, कितना कहना या बोलना है वो बताते हैं, 

शिव- आज्ञा चक्र को जागृत करते हैं, पूर्वानुमान की शक्ति के साथ व्यक्ति को बताते हैं वो इस जीव देह मे कई बार आ चुका है, ये जीवन मृत्यु कुछ नही, आत्मा ही सर्वोपरि है, भौतिक जगत मे जो दिख रहा है मिथ्या है, 

ब्रह्मा- ये अनन्त ब्रमांड से जोड़ कर अनन्त ज्ञान और बौद्धिक ऊर्जा प्रदान करते हैं! आध्यात्मिक विकास करते हैं! "


Tanha shayri

"तन्हाई मे बस यूही मुस्कुरा लेते हैं

अकेले मे बस युही गुनगुना लेते हैं

कोई पड़े न आँखों से गम को  मेरे

खुश है बहुत दुनिया को बता देते हैं"


Wednesday, 12 June 2024

Romantic shayri

 खामोश है लब, दिल कुछ कहना चाहता है, 

तन्हा है बहुत, बस साथ तेरे रहना चाहता है, 

कैसे तुझे दिखाये मोहब्बत की गहराई को, 

बस ये दिल ,संग तेरे मरना और जीना चाहता है

Romantic shayri

 "जीने के सौ बहाने है पास मेरे,

मरने के लिए तेरा रूठ जाना काफी है,

मुस्कुराने के सौ बहाने है पास मेरे

रोने के लिए बस तेरा दूर जाना काफी है"

Sunday, 2 June 2024

Shayri


 

 


कविता- इंतज़ार था

एक सदी से इंतज़ार था किसी का
जिससे कुछ दिल की बात कह तो ले
इंतजार था बस उस एक हमनशीं का
जिसके कंधे पे सर रख कर रो तो ले

है आज भी तन्हा बीते कल की तरह
न मिला जिससे हाल ए दिल कह तो ले

जिसको बनाना चाहा राजगार दिलका
चला गया कहकर तेरा दर्द हम ले क्यों ले

है अल्फाज़ बहुत सारे बयां करने को
कोई नही ऐसा जो इन्हे कभी सुन तो ले

खुद रोते हैं खुद ही अश्क पोछ लेते है
मेरे रोने की वज़ह काश कोई पूछ तो ले

रोज़ टूटते है रोज़ बिखरते है जिनके लिए
काश कभी यु बिखरा हुआ मुझे देख तो ले

मेरी नई कविता

Friday, 24 May 2024

देश के नाम कविता

 अर्ज़ किया है..


"चलो इस बार कुछ ऐसा काम कर जाए,
कूड़ा बहुत है देश मे मेरे उसको साफ कर आये,
अंधभक्तो  ने साहब के साथ मिल के फेलाई जो गंदगी
इस बार वोट किसी सही आदमी को दे आये

बाट दिया इंसा को इसां से जिंहोंने आज
ऐसे गद्दारो को अब देश से बाहर कर आये

नफरत बहुत फेल चुकी मजहब् के नाम पर
अब फिर से दिलो मे मोहब्बत फेला आये

वो बैठे मेरे घर दीप दिवाली के जलाये फ़िर
हम इनको भी आज ईद मुबारक कह आये"

Thursday, 9 May 2024

दर्द भरी शायरी

 Archana Mishra:

१-"ख्वाइशें कभी बहुत थी तुझसे,
पर वक़्त के साथ वो भी नही रही

शिकायते कभी बहुत थी तुझसे,
पर वक़्त के साथ वो भी नही रही"

२-"दिल की बात सिर्फ अपनो से की जाती हैं,
शिकायते गेरो से नही अपनो से हो जाती है,
अब शिकायतों का हक भी छूट गया तुझसे,
क्योंकि उम्मीदें सिर्फ अपनो से की जाती है!!"

Monday, 1 April 2024

तन्हा सी ज़िंदगी....





 

Meri nayi rachna


तन्हा सी ज़िंदगी में, एक सहारा ढूँढते है
गमो में डूबे  पर "खुशी" का किनारा ढूंढते हैं

दर्द दिल मे छिपा, मुस्कुरा रही है "मीठी"
जो समझ सके दर्द, वो साथी हमारा ढूंढते हैं

किसको बताये गम अपना, किसे समझाए 
बिन कहे समझ सके, वो राही प्यारा ढूंढते है

बिखर चुके, अरमानो की माला के ये मोती
फ़िर से पिरो सके, इन्हे वो नजारा ढूंढते है

अकेले मे रोते, तड़पते बेहिसाब हैं जनाब
समझ सके इन, आँसुओ को ,वो द्वारा ढूँढते हैं

खो चुके जीने की, उम्मीद, मौत का इतज़ार है
जो बहा ले जाए ,गमो से दूर, वो धारा ढूँढते हैं

तन्हा सी ज़िंदगी........

Monday, 26 February 2024

Romantic shayri

 "आज कुछ मुझे, ऐसे खो जाने दो

हर दूरी को तुम, अब मिट जाने दो

शर्म और हया के, बंधन तोड़ कर

साँसों को साँसों से, अब मिल जाने दो"

Sunday, 11 February 2024

भूत कौन होते हैं???? लेख

हम सबने भूतों के बारे मे बहुत सुना है, किसी किसी ने इन्हे देखा भी है ऐसा दावा करते है (मैंने भी देखा है, अपना अनुभव है)। आज जानेंगे ये होते कौंन है?? 

ये वह जीवात्मा होती है जो एक समय सीमा के फेर मे फस चुकी है, ये वो आत्माये होती है जो अपनी मृत्यु को अभी तक स्वीकार नही पायी है, और अपने अतीत मे ही रहना चाहती है, किंतु जब  अपने से आगे का वक्त और लोगो वो देखती है तो घबराने लगती है, वो ये बताने की कोशिश करती है की सत्य तुम और तुम्हारा ये वक़्त नही बल्कि ये है, और इसी प्रयास के चलते जब वो आम लोगों से संपर्क साधने मे सफल हो जाती है तब जीवित लोगो को लगता है कोई अद्रश्य शक्ति उन्हे परेशां कर रही जबकि अधिकतर ये आत्माये नुकसान नही पहुँचना चाहती बस अपनी उपस्तिथि और वो सही है ये बताने हेतु संपर्क करती है। 

कुछ आत्माये अपने समय से पूर्व जब देह त्याग देती है तब वो अपने सही समय के आने तक वो भटकती है तो कुछ अपनी अधूरी इच्छा पूर्ति होने तक, तो कुछ अपनी इच्छा से वर्षों तक भटकती है। 

कुछ आत्माये देह त्यागने के बाद भी भले वो time zone में फँस गयी है किंतु भौतिक सुख की लालसा इन्हे बहुत होती है इसलिए किसी के शरीर मे अपना आशियाना बना कर भौतिक सुख प्राप्त करती है। 

तांत्रिक इन बेबस आत्माओ को इस time लूप से बाहर निकालने का वादा कर के अपने कार्य करवाते हैं और इनका शोषण करते, इन्हे अन्य लोगों को सताने का कार्य करवाते हैं। 

हर धर्म मे मृत्यु के बाद इस time zone se बाहर निकलने हेतु भिन्न भिन्न संस्कार की व्यवस्था है, किँतु फिर भी ये आत्मा की विभिन्न अवस्थाओ pr निर्भर करता है कि वो मुक्त होना चाहती है कि नही। 

संचिप्त में इतना कह सकते हैं time लूप मे फंसी जीवात्मा है bhoot-pret कहलाती है। 

जय माता दी

धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्ति- लेख

 एक आध्यात्मिक व्यक्ति और धार्मिक व्यक्ति मे बहुत फर्क होता है, आमतौर पर दोनों को एक समझ लेते हैं जैसे- भगवान्, परमात्मा, देवता, और ईश्वर को, किँतु ये सब अलग है, ठीक वैसे ही धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्ति मे फर्क है,। 

धार्मिक व्यक्ति चाहे जिस भी धर्म का हो, वही पुरानी धार्मिक किताबो पर लिखें हुए पर चलता रहता है, खुद कभी सवाल नही करता, ईश्वर से जुड़ कर कभी परम सत्य जो उस किताब मे नही लिखा या पडा उसके बाहर जानने की चेष्टा नही करता, उसने अपनी सोच को एक सीमा मे कैद किया है और वो उससे बाहर निकलना ही नही चाहता, जो परंपरा विरासत मे मिली उसको ही निभा रहा है ये जाने बिना की क्या ये सत्य है भी, पर चला रहा उस परंपरा को। 
एक मिथ जो सदियों से फेलाया हुआ है की महिलाएं मासिक धर्म मे अशुद्ध होती है, इसलिए पूजा नही कर सकती, खाना नही बना सकती, और महिलाएं इस झूठ को सदियों से ढो रही है और आगे भी ढोती रहेंगी। 

लेकिन आध्यात्मिक व्यक्ति पुरानी रुदीवादी इस सोच का खंडन करता है, आध्यात्मिक व्यक्ति सिर्फ किसी किताब, मूर्ति या धार्मिक स्थल तक सीमित नही, उसकी सोच व्यापक होती है, वो जिस समुदाय मे जन्म लेते हैं, वहा मौजूद बुराई को खत्म करने का कार्य करते, अपने समुदाय से बुराई मिटाने के लिए गलत को गलत बोलने का साहस रखते हैं न की धर्म का चोगा ओड कर इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं, धीरे- धीरे उनकी बात से जो व्यक्ति सहमत होते जाते हैं वो जुड़ते जाते हैं, उनका एक समूह बन जाता है, नतिजतं परंपरवादी सोच के व्यक्ति उन्हे अपने अपने समुदाय से बेदखल कर देते हैं, प्रताड़ित करते हैं जैसे प्रभु येशु को यहूदियों ने किया, बुद्ध को हिंदुओं ने अपने समुदाय से पृथक कर दिया, महावीर को भी हिंदुओं ने ख़ुद से पृथक कर दिया, क्योंकि इन्होंने धार्मिक विचारधारा को नही बल्कि आध्यात्मिक सोच और विचारधारा को अपनाया। 

वही मीरा बाई को देखिये, कृष्ण भक्ति मे डूबी एक महिला, बहुत से तो उसको द्वापर मै किसी गोपी का रूप तक कहते हैं, उसने परंपरवादी सोच को अपनाया, मूर्ति पूजा की, कुछ नया समाज के सामने नही लाई, वही रटी रटाई धर्मिकता दिखाई इसलिए हिंदू बहुत मानते हैं। 

किंतु यहाँ एक समस्या और है, जो व्यक्ति आध्यात्मिक हो जाता है, उसकी सोच से जो समाज प्रभावित हो जाता है, वो उस आध्यात्मिक व्यक्ति को ही धर्म बना लेता है, प्रभु येशु ने न बाईबल लिखी न ईसाई धर्म बनाया, न भगवान् बुद्ध ने कोई धर्म बनाया, अपितु इन्होंने आध्यात्मिक परम सत्य से जग को परिचित करवाने का प्रयास किया तो लोगों ने इनको ही धर्म बना दिया 

यही मुख्य अंतर है धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्ति मे, धार्मिक व्यक्ति को धर्म के नाम पर मूर्ख बड़े आसानी से बनाया जा सकता है क्योंकि उसकी अपनी कोई सोच समझ नही, लेकिन आध्यात्मिक व्यक्ति को धर्मिकता और ईश्वर के नाम पर मूर्ख नही बनाया जा सकता क्योंकि वो सवाल करना जानता है, उसने रट्टा मार के ज्ञान हासिल नही किया अपितु गहन साधना और सवाल जवाब द्वारा ज्ञान हासिल किया  है, इसलिए उसको मूर्ख नही बनाया जा सकता, आध्यात्मिक व्यक्ति जाती, धर्म, संप्रदाय, भाषा, वेश भूषा इत्यादि से परे सत्य का साथ देता है, निरंतर खोज मे रहता है किंतु धार्मिक व्यक्ति सीमित सोच रखता है और उसको ही सत्य मानता है। 
एक कविता जो बचपन मे पड़ी थी वो धार्मिक व्यक्तियों के लिए है 
"सबसे पहले मेरे घर का अंडे जैसा था आकार
तब मै यही समझती थी की इतना सा ही है संसार"

Monday, 5 February 2024

दर्द भरी शायरी

 दिल पूछता है, मेरा की मोहब्बत के सिवा, क्या कि खता 

बस बेइंतहा, किसी को चाहने की , हर बार क्यों मिली सज़ा

Shayri

 ज़िंदगी से दर्द बहुत मिला 

पर दिलदार कोई न मिला, 

तन्हा ही रहे कुछ ऐसे की

साथ किसीका  फ़िर न मिला, 


मोहब्बत में हर बार धोख़ा मिला

पर सच्चा प्यार कभी कोई न मिला

दिल तोड़ने वाले आये ज़िंदगी मे 

कोई उमर भर साथ देने वाला न मिला

Sunday, 4 February 2024

ईश्वर वाणी-299, भगवान् कहाँ है??

ईश्वर और भगवान् मे यही मुख्य अंतर है, भगवान् के लिए तुम्हें मानव निर्मित मूर्ति और धार्मिक स्थल की आवश्यकता होती है, जबकि ईश्वर जो संपूर्ण और अंनत जगत का स्वामी है, वो न मानव निर्मित मूरत मे है न धार्मिक स्थल मे, जबकि हर एक वस्तु व ब्रमांड उसमे ऐसे समाया है जैसे तुम्हारे शरीर मे तुम्हारे अंग। जैसे शरीर के बिना इन अंगो का कोई मोल नही वैसे ईश्वर  के बिना भगवान् का कोई मोल नही। 

हर वो व्यक्ति भगवान् है जो वक़्त पर किसी के काम आया है, मरते व्यक्ति की जान बचाने वाला चिकित्सक भगवान् है, कर्ज मे डूबे व्यक्ति का कर्ज माफ करने वाला भगवान् है, जबकि ईश्वर इनसे उपर है, प्राणी जाती की सहायता हेतु वो मानव निर्मित भगवान् देश, काल, परिस्तिथि अनुसार भेजता रहता है और भेजता रहेगा, उसको पता है बिना भगवान् को जाने ईश्वर को नही जान सकते जैसे की पवित्र बाइबल मे लिखा है बिना पुत्र को जाने पिता को नही जान सकते। 


प्राचीन हिंदू मन्दिर, शिव लिंग्, शक्ति पीठ मे कोई प्राचीन मूरत किसी मानविये आकर की नही, समस्त गृह नक्षत्र बस एक आकर गोल ही क्यों है??? 


इनसे परमपिता पर्मेश्वर् हमें बताता है मै तो स्वम शून्य हूँ, शून्य अर्थात कुछ न हो कर ख़ुद मे संपूर्ण, ब्रमांड का आकर भी विशाल शून्य है, उसको किसी धार्मिक संस्था की आवश्यकता नही। ईश्वर को प्राप्त करने हेतु किसी मानव निर्मित न मूरत आवश्यकता है न धार्मिक स्थल, पवित्र शास्त्र कहते है एक दिन भगवान् के लोक भी नष्ट् हो जायेंगे, फिर तुम मानव निर्मित आरधानालयों के लिए लड़ते हो, सब एक दिन उस परम आत्मा मे विलीन हो जायेगा जिसे परमात्मा कहते हैं, जो ईश्वर से निकला अवश्य है किंतु कभी नाश न होगा जैसे तुम्हारी आत्मा युग युगों तक नाश नही होती, उस परमात्मा में विलीन हो कर फ़िर से भगवान्, देव, गृहों, व मानव, पशु, पक्षी व जीवों की उत्पति होगी, यही शृष्टि का नियम है, अनन्त है जो चलता रहा है चलता रहेगा। 🙏🙏🙏🙏🙏


 

Saturday, 3 February 2024

ईश्वर वाणी-297, ईश्वर कहाँ है, कौन है

 

एक सच्चा आध्यात्मिक व्यक्ति जब भी उस परम शक्ति का नाम लेता है तो कहता है 'ईश्वर तुम्हारा भला करे', अथवा बात बात पर उसके मुख से ईश्वर शब्द निकलता, ईश्वर शब्द किसी धर्म और धार्मिक मान्यता को नही दर्शता, ईश्वर शून्य है जैसे तुम्हारे जन्म से पूर्व तुम्हारा ये शरीर शून्य था और मृत्यु के बाद शून्य हो जायेगा, ईश्वर शब्द सभी देव, देवता, भगवान्, नबी, अल्ला, गॉड, गृह, नक्षत्र सभी बड़ी से बड़ी दिव्य ऊर्जाओ को ख़ुद मे समाये है जबकि भगवान् शब्द तुम्हे देह से जोड़ता है जो नाशवान है, यही कल्पना तुम्हें मूर्ति से जोड़ती है, यही विचारधारा आध्यात्मिक उन्नति मे बाधा है क्योंकि तुम इससे उपर बड़ना ही नही चाहते, खुद को इस मूरत मे बांध लिया और इसी को सत्य मान कर आपस धर्म के नाम पर लड़ते हो, पर सच्चा आध्यात्मिक व्यक्ति इससे उपर उठ चुका है, वो चाहे घर पर हो अथवा मंदीर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे सब स्थान पर सिर्फ ईश्वर को देखता है न की शरीर और शरीरिक कार्यो को जिसको भगवान् ने इस शरीर द्वारा किए, क्योंकि शरीर नश्वान है मिट गया और ऊर्जा फ़िर दूसरी देह मे चली गयी पर ईश्वर न मिटा है न मिटेगा, ऐसी अनन्त ऊर्जा का वो स्वामी है, इसलिए वो ईश्वर है, जो समस्त जीवों मे है, अनन्त ब्रह्मांड मे है, जिसको किसी स्थान विशेष की आवश्यकता नही क्योंकि वो तो हर स्थान पर है,
पाप मे भी वो है शैतान स्वरूप मे, नेकी मे भी वो है भगवान् स्वरूप मे। इसलिए सच्चे आध्यात्मिक व्यक्ति उस ईश्वर को पूजते है भले अपने ईष्ट स्वरूप किसी भगवान् की वो पूजा करते हो।

जय हो परमपिता पर्मेश्वर् की
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

दर्द वाली शायरी

 कितना आसान था, तेरा मुझसे यु मुहॅ मोड़ना

कितना आसान था, तेरा ये दिल मेरा तोड़ना

हम तेरी ख़ुशी के लिए, दर्द में भी मुस्कुराते रहे

कितना आसान था, तेरा यु तन्हा मुझे छोड़ना



Sunday, 28 January 2024

कविता

 न तेरे संग रहने का कोई अरमाँ है अब

न तेरे दूर जाने है कोई अब गम मुझे

तू खुश है अपनी ज़िंदगी मे ये बहुत है

क्योंकि न तू , न मैं हमदर्द समझू तुझे

प्रभु के लिए कविता

 Mere pyare prabhu yeshu k liye mere likhe kuchh shabd.... Mere Pratham Aadhyatmik Guru.... Koti koti naman, Happy Birthday Jesus.। I love you


दुनिया ने ठुकराया, बस तूने अपनाया है

हारो का येशु, तूने गले मुझे लगाया है

करू तेरी स्तुति, करूँ तुझको नमन मै

येशु ने मुझको, अपने दिलमे बसाया है


राजाओं के राजा, तु मेरे दिलमे समाया है

ऐ मेरे मालिक, बस तुझे अपना बनाया है

तू है सच्चा गुरु, मेरा तुही सच्चा रब है 

दर्शन देने के लिए, आज तू मेरे घर पे आया है

प्यार वाली शायरी

 जय सिया राम।  

"जैसे सिया बिन राम अधूरे

राधा बिन घनश्याम अधूरे

वैसे ही दिल-ओ-जान से

   तुम बिन हम सुबह शाम अधूरे"

प्यारी वाली शायरी

 जिंदगी में पग-पग, मिल रही है मुझे चुनोती है

येशु इक तुही, मेरे जीवन की ज्योति है

दुनिया से जीते खुदसे हार गए है

कर के याद, मीठी- ख़ुशी के लिए रोती है

शायरी

 हम तो जीते जी, यु मर गए

दुनिया से लड़ते लड़ते, अब थक गए 

एक आसरा है , तेरा सभाल ले हमें अब

हम तो अब बस ,ख़ुद से ही हार गए